नज़्म

ये दुनिया अगर मिल भी जाए

साहिर लुधियानवी · सब कलाम देखें
यहाँ एक खिलौना है इंसां की हस्तीये बस्ती है मुर्दा-परस्तों की बस्तीयहाँ पर तो जीवन से है मौत सस्तीये दुनिया अगर मिल भी जाए तो क्या है