ग़ज़ल
कह दूँ तुम्हें या चुप रहूँ
कह दूँ तुम्हेंया चुप रहूँदिल में मेरे आज क्या हैकह दूँ तुम्हें या चुप रहूँदिल में मेरे आज क्या हैजो बोलो तो जानूँ गुरू तुमको मानूँचलो ये भी वादा हैकह दूँ तुम्हें...
सोचा है तुमने कि चलते ही जाएँतारों से आगे कोई दुनिया बसाएँतो तुम बताओसोचा ये है कि तुम्हें रस्ता भुलाएँसूनी जगह पे कहीं छेड़ें सताएँहाय रे ना नाये ना करनाअरे नहीं रे नहीं रे नहीं रे नहीं रे नहीं नहींकह दूँ तुम्हें...
सोचा है तुमने कि कुछ गुनगुनाएँमस्ती में झूमें ज़रा धूमें मचाएँतो तुम बताओ नासोचा ये है कि तुम्हें नज़दीक लाएँफूलों से होंठों की लाली चुराएँहाय रे ना नाये ना करनाअरे नहीं रे नहीं रे नहीं रे नहीं रे नहीं नहींकह दूँ तुम्हें...
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