ग़ज़ल

किस का रस्ता देखे, ऐ दिल, ऐ सौदाई

साहिर लुधियानवी · सब कलाम देखें
किस का रस्ता देखे, ऐ दिल, ऐ सौदाईमीलों है खामोशी, बरसों है तनहाईभूली दुनिया, कभी की, तुझे भी मुझे भीफिर क्यों आँख भर आईओ, किस का रस्ता देखे ...
कोई भी साया नहीं राहों मेंकोई भी आएगा न बाहों मेंतेरे लिए मेरे लिए कोई नहीं रोने वाला होझूटा भी नाता नहीं चाहों मेंतू ही क्यों डूबा रहे आहों मेंकोई किसी संग मरे, ऐसा नहीं होने वालाकोई नहीं जो यूँ ही जहाँ में, बाँटे पीर पराईहो, किस का रस्ता देखे ...
तुझे क्या बीती हुई रातों सेमुझे क्या खोई हुई बातों सेसेज नहीं, चितह सही, जो भी मिले सोना होगा, होगई जो डोरी छूट हाथों से, ओलेना क्या छूटे हुए साथों सेखुशी जहाँ माँगी तूने, वहीं मुझे रोना होगान कोई तेरा, न कोई मेरा, फिर किसकी याद आईओ, किस का रस्ता देखे ...
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