ग़ज़ल

अब वो करम करें कि सितम मैं नशे में हूँ

साहिर लुधियानवी · सब कलाम देखें
अब वो करम करें कि सितम, मैं नशे में हूँ ।मुझको न कोई होश न ग़म, मैं नशे में हूँ ।
सीने से बोझ उनके ग़मों का उतार के,आया हूँ आज अपनी जवानी को हार के,कहते हैं डगमगाते क़दम, मैं नशे में हूँ ।
वो बेवफ़ा है अब भी ये दिल मानता नहीं,कम्बख़्त ना-समझ है उन्हें जानता नहीं,मैं आज तोड़ दूँगा भरम, मैं नशे में हूँ ।
फ़ुर्सत नहीं है रोने-रुलाने के वास्ते,आए न उनकी याद सताने के वास्ते,इस वक़्त दिल में दर्द है कम, मैं नशे में हूँ ।
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