ग़ज़ल

कौन आया कि निगाहों में चमक जाग उठी

साहिर लुधियानवी · सब कलाम देखें
कौन आया कि निगाहों में चमक जाग उठी,दिल के सोए हुए तारों में खनक जाग उठी ।
किसके आने की ख़बर ले के हवाएँ आईं,जिस्म से फूल चटकने की सदाएँ आईं,रूह खिलने लगी साँसों में महक जाग उठी,दिल के सोए हुए तारों में खनक जाग उठी ।
किसने यूँ मेरी तरफ़ देख के बाहें खोलीं,शोख़ जज़्बात ने सीने में निगाहें खोलीं,होंट तपने लगे ज़ुल्फ़ों में लचक जाग उठी,दिल के सोए हुए तारों में खनक जाग उठी ।
किसके हाथों ने मिरे हाथों से कुछ माँगा है,किसके ख़्वाबों ने मिरे ख़्वाबों से कुछ माँगा है,दिल मचलने लगा आँचल में धनक जाग उठी,दिल के सोए हुए तारों में खनक जाग उठी ।
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