ग़ज़ल
अभी न जाओ छोड़ कर के दिल अभी भरा नहीं
अभी न जाओ छोड़ कर के दिल अभी भरा नहींअभी अभी तो आई हो अभी अभी तोअभी अभी तो आई हो, बहार बनके छाई होहवा ज़रा महक तो ले, नज़र ज़रा बहक तो लेये शाम ढल तो ले ज़रा ये दिल सम्भल तो ले ज़रामैं थोड़ी देर जी तो लूँ, नशे के घूँट पी तो लूँनशे के घूँट पी तो लूँअभी तो कुछ कहाँअहीं, अभी तो कुछ सुना नहींअभी न जाओ छोड़कर के दिल अभी भरा नहीं
सितारे झिलमिला उठे, सितारे झिलमिला उठे, चराग़ जगमगा उठेबस अब न मुझको टोकनाबस अब न मुझको टोकना, न बढ़के राह रोकनाअगर मैं रुक गई अभी तो जा न पाऊँगी कभीयही कहोगे तुम सदा के दिल अभी नहीं भराजो खत्म हो किसी जगह ये ऐसा सिलसिला नहींअभी नहीं अभी नहींनहीं नहीं नहीं नहींअभी न जाओ छोड़कर के दिल अभी भरा नहीं
अधूरी आस, अधूरी आस छोड़के, अधूरी प्यास छोड़केजो रोज़ यूँही जाओगी तो किस तरह निभाओगीकि ज़िंदगी की राह में, जवाँ दिलों की चाह मेंकई मुक़ाम आएंगे जो हम को आज़माएंगेबुरा न मानो बात का ये प्यार है गिला नहींहाँ, यही कहोगे तुम सदा के दिल अभी नहीं भराहाँ, दिल अभी भरा नहींनहीं नहीं नहीं नहीं
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