ग़ज़ल
उदास न हो
मेरे नदीम मेरे हमसफ़र उदास न होकठिन सही तेरी मन्जिल मगर उदास न हो
कदम कदम पे चट्टानें खडी़ रहें लेकिनजो चल निकले हैं दरिया तो फिर नहीं रुकतेहवाएँ कितना भी टकराएँ आँधियाँ बनकरमगर घटाओं के परछम कभी नहीं झुकतेमेरे नदीम मेरे हमसफ़र...
हर एक तलाश के रास्ते में मुश्किलें हैं मगरहर एक तलाश मुरादों के रंग लाती हैहजारों चाँद सितारों का खून होता हैतब एक सुबह फ़िजाओं पे मुस्कुराती हैमेरे नदीम मेरे हमसफ़र...
जो अपने खून को पानी बना नहीं सकतेवो जिंदगी में नया रंग ला नहीं सकतेजो रास्ते के अँधेरों से हार जाते हैंवो मंजिलों के उजाले को पा नहीं सकतेमेरे नदीम मेरे हमसफ़र...
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