ग़ज़ल
इस रेशमी पाज़ेब की झंकार के सदके
इस रेशमी पाज़ेब की झंकार के सदकेजिस ने ये पहनाई है उस दिलदार के सदके
उस ज़ुल्फ़ के क़ुरबान लब-ओ-रुक़सार के सदकेहर जलवा था इक शोला हुस्न-ए-यार के सदके
जवानी माँगती ये हसीं झंकार बरसों सेतमन्ना बुन रही थी धड़कनों के तार बरसों सेछुप-छुप के आने वाले तेरे प्यार के सदकेइस रेशमी पाज़ेब की ...
जवानी सो रही थी हुस्न की रंगीं पनाहों मेंचुरा लाये हम उन के नाज़नीं जलवे निगाहों मेंक़िस्मत से जो हुआ है उस दीदार के सदकेउस ज़ुल्फ़ के क़ुरबान ...
नज़र लहरा रही थी ज़ीस्त पे मस्ती सी छाई हैदुबारा देखने की शौक़ ने हल्चल मचाई हैदिल को जो लग गया है उस अज़ार के सदकेइस रेशमी पाज़ेब की ...
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