ग़ज़ल
अगर मुझे न मिली तुम तो मैं ये समझूँगा
अगर मुझे न मिली तुम तो मैं ये समझूँगाकि दिल की राह से होकर ख़ुशी नहीं गुज़री
अगर मुझे न मिले तुम तो मैं ये समझूँगीकि सिर्फ़ उम्र कटी ज़िंदगी नहीं गुज़री
फ़िज़ा में रंग नज़ारों में जान है तुमसेमेरे लिए ये ज़मीं आसमान है तुमसेख़याल-ओ-ख़्वाब की दुनिया जवान है तुमसे,अगर मुझे न मिले तुम तो मैं ये समझूँगीकि ख़्वाब ख़्वाब रहे बेकसी नहीं गुज़रीअगर मुझे न मिली तुम तो मैं ये समझूँगाकि दिल की राह से होकर ख़ुशी नहीं गुज़री
बड़े यक़ीन से मैंने ये हाथ माँगा हैमेरी वफ़ा ने हमेशा का साथ माँगा हैदिलों की प्यास ने आब-ए-हयात माँगा हैदिलों की प्यास ने आब-ए-हयात माँगा है
अगर मुझे न मिले तुम तो मैं ये समझूँगीकि इंतज़ार की मुद्दत अभी नहीं गुज़री
अगर मुझे न मिले तुम तो मैं ये समझूँगीकि सिर्फ़ उम्र कटी ज़िंदगी नहीं गुज़री
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