ग़ज़ल
उड़ें जब जब ज़ुल्फ़ें तेरी
उड़ें जब जब ज़ुल्फ़ें तेरीहो, उड़ें जब जब ज़ुल्फ़ें तेरीकुँवारियों का दिल मचलेजिन्द मेरियेहों जब ऐसे चिकने चेहरेतो कैसे न नज़र फिसलेजिन्द मेरिये
हो, रुत प्यार करन की आईके बेरियों के बेर पक गयेजिंद मेरियेकभी डाल इधर भी फेराके तक-तक नैन थक गयेजिन्द मेरिये
हो, उस गाँव से सँवर कभी सद्क़ेके जहाँ मेरा यार बसताजिंद मेरियेपानी लेने के बहाने आजाके तेरा मेरा इक रस्ताजिन्द मेरियेहो, तुझे चाँद के बहाने देखूँतू छत पर आजा गोरियेजिंद मेरिये
अभी छेड़ेंगे गली के सब लड़केके चाँद बैरी छिप जाने देजिन्द मेरियेहो, तेरी चाल है नागिन जैसीरे जोगी तुझे ले जायेंगेजिंद मेरिये
जायेँ कहीं भी मगर हम सजनायह दिल तुझे दे जायेंगेजिन्द मेरिये
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