ग़ज़ल
कहना इक दीवाना तेरी याद में आहें भरता है
कहना इक दीवाना तेरीयाद में आहें भरता हैलिख कर तेरा नाम ज़मीं परउसको सजदे करता है
चाक-गिरेबाँ, खाक़-बसरफिरता है सूनी राहों मेंसायों को लिपटाता हैऔर लैला लैला करता हैलिख कर तेरा नाम...
तेरी एक झलक की ख़ातिरजान आँखों में अटकी हैजी का ऐसा हाल हुआ हैजीता है न मरता हैलिख कर तेरा नाम...
ख़ुद को भूल गया है लेकिनतेरी याद नहीं भूलादिल के जितने ज़ख़्म हैंउनमें तेरा ही अक़्स उभरता हैलिख कर तेरा नाम...
कहना मेरे दीवाने सेलैला तेरी अमानत हैतेरी बाहों में दम देगीतू जिसका दम भरता हैदिल के जितने ज़ख़्म हैंउनमें तेरा ही अक़्स उभरता है
सदक़े जाऊँ इस क़ासिद परजिससे ये पैग़ाम मिलामेरा क़ातिल मेरा मसीहाअब भी मुझ पर मरता है
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