ग़ज़ल
बाम पर आए कितनी शान से आज
बाम पर आए कितनी शान से आजबढ़ गए आप आसमान से आज
किस मज़े की हवा में मस्ती हैकहीं बरसी है आसमान से आज
मैं ने छेड़ा तो किस अदा से कहाकुछ सुनोगे मिरी ज़बान से आज
नीची दाढ़ी ने आबरू रख लीक़र्ज़ पी आए इक दुकान से आज
कोई जा कर ‘रियाज़’ को समझाएकुछ ख़फ़ा हैं वो अपनी जान से आज
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