ग़ज़ल

केसवे बिकट माया तोर

रैदास · सब कलाम देखें
।। राग आसावरी (आसा)।।
केसवे बिकट माया तोर।ताथैं बिकल गति मति मोर।। टेक।।सु विष डसन कराल अहि मुख, ग्रसित सुठल सु भेख।निरखि माखी बकै व्याकुल, लोभ काल न देख।।१।।इन्द्रीयादिक दुख दारुन, असंख्यादिक पाप।तोहि भजत रघुनाथ अंतरि, ताहि त्रास न ताप।।२।।प्रतंग्या प्रतिपाल चहुँ जुगि, भगति पुरवन कांम।आस तोर भरोस है, रैदास जै जै राम।।३।।
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