ग़ज़ल
दानी नए भए माँबन दान सुनै
दानी नए भए माँबन दान सुनै गुपै कंस तो बांधे नगैहोरोकत हीं बन में रसखानि पसारत हाथ महा दुख पैहो।
टूटें धरा बछरदिक गोधन जोधन हे सु सबै पुनि दहो।जेहै जो भूषण काहू तिया कौ तो मोल छला के लाला न विकेहो।
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