ग़ज़ल

खेलत फाग सुहाग भरी

रसखान · सब कलाम देखें
खेलत फाग सुहाग भरी, अनुरागहिं लालन क धरि कै ।भारत कुंकुम, केसर की पिचकारिन में रंग को भरि कै ॥गेरत लाल गुलाल लली, मनमोहन मौज मिटा करि कै ।जात चली रसखान अली, मदमस्त मनी मन कों हरि कै ॥
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