ग़ज़ल

नो लख गाय सुनी हम नंद के

रसखान · सब कलाम देखें
नो लख गाय सुनी हम नंद के,::तापर दूध दही न अघाने।माँगत भीख फिरौ बन ही बन,::झूठि ही बातन के मन मान।और की नारिज के मुख जोवत,::लाज गहो कछू होइ सयाने।जाहु भले जु भले घर जाहु,::चले बस जाहु वृंदावन जानो।
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