ग़ज़ल

आवत लाल गुलाल लिए मग

रसखान · सब कलाम देखें
आवत लाल गुलाल लिए मग सुने मिली इक नार नवीनी।त्यों रसखानि जगाइ हिये यटू मोज कियो मन माहि अधीनी।सारी फटी सुकुमारी हटी, अंगिया दरकी सरकी रंग भीनी।लाल गुलाल लगाइ के अंक रिझाइ बिदा करि दीनी।
पाठ सत्यापित · Text verified against Kavita Kosh