ग़ज़ल
ब्रह्म मैं ढूँढयो पुराण गानन
ब्रह्म मैं ढूँढयो पुरानन-गानन बेद रिचा सुनि चौगुने गायन.देख्यो सुन्यो कबहूँ न कहूँ वह कैसे सरूप औ कैसे सुभायन.टेरत हेरत हारि परयो रसखानि बतायो न लोग लुगायन.देख्यो दुरो वह कुंज कुटीर में बैठो पलोटतु राधिका-पायन.
पाठ सत्यापित · Text verified against Kavita Kosh