ग़ज़ल
एक समै जमुना-जल में सब मज्जन हेत
एक समै जमुना- जल में सब मज्जन हेत,::धंसी ब्रज-गोरी।त्यौं रसखानि गयौ मन मोहन लेकर चीर,::कदंब की छोरी।न्हाई जबै निकसीं बनिता चहुँ ओर चित,::रोष करो री।हार हियें भरि भखन सौ पट दीने लाला,::वचनामृत बोरी।
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