ग़ज़ल

गोरी बाल थोरी वैस, लाल पै गुलाल मूठि

रसखान · सब कलाम देखें
गोरी बाल थोरी वैस, लाल पै गुलाल मूठि -:तानि कै चपल चली आनँद-उठान सों ।वाँए पानि घूँघट की गहनि चहनि ओट,:चोटन करति अति तीखे नैन-बान सों ॥कोटि दामिनीन के दलन दलि-मलि पाँय,:दाय जीत आई, झुंडमिली है सयान सों ।मीड़िवे के लेखे कर-मीडिवौई हाथ लग्यौ,:सो न लगी हाथ, रहे सकुचि सुखान सों ॥
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