ग़ज़ल
कर कानन कुंडल मोरपखा
कर कानन कुंडल मोरपखा उर पै बनमाल बिराजती हैमुरली कर में अधरा मुस्कानी तरंग महाछबि छाजती हैरसखानी लखै तन पीतपटा सत दामिनी कि दुति लाजती हैवह बाँसुरी की धुनी कानि परे कुलकानी हियो तजि भाजती है
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