ग़ज़ल
कीगै कहा जुपै लोग चवाब सदा
कीगै कहा जुपै लोग चवाब सदा करिबो करि हैं::बृज मारो।सीत न रोकत राखत कागु सुगावत ताहिरी::गाँव हारो।
आवरी सीरी करै अंतियां रसखान धनै धन::भाग हमारौ।आवत हे फिरि आज बन्यो वह राति के रास को::नायन हारौ।
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