ग़ज़ल
जेहि बिनु जाने कछुहि नहिं
जेहि बिनु जाने कछुहि नहिं जान्यों जात बिसेस.सोई प्रेम जेहि आन कै रही जात न कछु सेस.प्रेम फाँस सो फँसि मरै सोई जियै सदाहिं .प्रेम मरम जाने बिना मरि कोउ जीवत नाहिं.
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