ग़ज़ल
नंदू को जुकाम
बहुत जुकाम हुआ नंदू को,एक रोज वह इतना छींका।इतना छींका, इतना छींका,इतना छींका, इतना छींका।सब पत्ते गिर गए पेड़ के,धोखा हुआ उन्हें आंधी का!
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