ग़ज़ल

नंदू को जुकाम

रामनरेश त्रिपाठी · सब कलाम देखें
बहुत जुकाम हुआ नंदू को,एक रोज वह इतना छींका।इतना छींका, इतना छींका,इतना छींका, इतना छींका।सब पत्ते गिर गए पेड़ के,धोखा हुआ उन्हें आंधी का!
स्रोत-सत्यापन प्रतीक्षित — This text is pending verification against an authoritative source and may contain errors.