ग़ज़ल
जिहि कारन बार न लाये कछू
जिहि कारन बार न लाये कछू, गहि संभु-सरासन दोय किया।गये गेहहिं त्यागि कै ताही समै सु निकारि पिता बनवास दिया॥कहे बीच ’रहीम’ रर्यौ न कछू, जिन कीनो हुतो बिनुहार किया।बिधि यों न सिया रसबार सिया करबार सिया पिय सार सिया॥
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