ग़ज़ल
उत्तम जाति है बाह्मनी
उत्तम जाति है बाह्मनी, देखत चित्त लुभाय।परम पाप पल में हरत, परसत वाके पायरूपरंग रतिराज में, छतरानी इतरान।मानौ रची बिरंचि पचि, कुसुम कनक में सानबनियाइनि बनि आइकै, बैठि रूप की हाट।पेम पेक तन हेरिकै, गरुवै टारति बाटगरब तराजू करति चख, भौंह मोरि मुसकाति।डाँड़ी मारति बिरह की, चित चिंता घटि जाति
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