ग़ज़ल

अति अनियारे मानौ सान दै सुधारे

रहीम · सब कलाम देखें
अति अनियारे मानौ सान दै सुधारे,महा विष के विषारे ये करत पर-घात हैं।ऐसे अपराधी देख अगम अगाधी यहै,साधना जो साधी हरि हिय में अन्हात हैं॥बार बार बोरे याते लाल लाल डोरे भये,तौहू तो ’रहीम’ थोरे बिधि न सकात हैं।घाइक घनेरे दुखदाइक हैं मेरे नित,नैन बान तेरे उर बेधि बेधि जात हैं॥
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