ग़ज़ल
चेहरा मेरा था निगाहें उस की
चेहरा मेरा था निगाहें उस कीख़ामुशी में भी वो बातें उस की
मेरे चेहरे पे ग़ज़ल लिखती गईंशेर कहती हुई आँखें उस की
शोख़ लम्हों का पता देने लगींतेज़ होती हुई साँसें उस की
ऐसे मौसम भी गुज़ारे हम नेसुबहें जब अपनी थीं शामें उस की
ध्यान में उस के ये आलम था कभीआँख महताब की यादें उस की
फ़ैसला मौज-ए-हवा ने लिक्खाआँधियाँ मेरी बहारें उस की
नीन्द इस सोच से टूटी अक्सरकिस तरह कटती हैं रातें उस की
दूर रह कर भी सदा रहती हैमुझ को थामे हुए बाहें उस की
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