ग़ज़ल
एक पैग़ाम
वही मौसम हैबारिश की हँसीपेड़ों में छन छन गूँजती हैहरी शाख़ेंसुनहरे फूल के ज़ेवर पहन करतसव्वुर में किसी के मुस्कराती हैंहवा की ओढ़नी का रंग फिर हल्का गुलाबी हैशनासा बाग़ को जाता हुआ ख़ुशबू भरा रस्ताहमारी राह तकता हैतुलू-ए-माह की साअतहमारी मुंतज़िर है
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