ग़ज़ल

ज़िन्दा रहने की ख़्वाहिश

परवीन शाकिर · सब कलाम देखें
दाने तक जब पहुँची चिड़ियाजाल में थीज़िन्दा रहने की ख़्वाहिश ने मार दिया।
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