ग़ज़ल

गुमान

परवीन शाकिर · सब कलाम देखें
मैं कच्ची नींद में हूँऔर अपने नीमख़्वाबिदा तनफ़्फ़ुस में उतरतीचाँदनी की चाप सुनती हूँगुमाँ हैआज भी शायदमेरे माथे पे तेरे लबसितारे से बात करते हैं
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