ग़ज़ल

तुझसे तो कोई गिला नहीं है

परवीन शाकिर · सब कलाम देखें
तुझसे तो कोई गिला नहीं हैक़िस्मत में मेरी सिला नहीं है
बिछड़े तो न जाने हाल क्या होजो शख़्स अभी मिला नहीं है
जीने की तो आरज़ू ही कब थीमरने का भी हौसला नहीं है
जो ज़ीस्त को मोतबर बना देऎसा कोई सिलसिला नहीं है
ख़ुश्बू का हिसाब हो चुका हैऔर फूल अभी खिला नहीं है
सहशारिए-रहबरी में देखापीछे मेरा काफ़िला नहीं है
इक ठेस पे दिल का फूट बहनाछूने में तो आबला नहीं है
गिला=शिकायत; सिला=सफलता; ज़ीस्त=जीवन; मोतबर=विश्वसनीय; सरशारिए-रहबरी=नेतृत्व के पूर्ण हो जाने पर; आबला=छाला
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