ग़ज़ल

उसने फूल भेजे हैं

परवीन शाकिर · सब कलाम देखें
उसने फूल भेजे हैंफिर मेरी अयादत कोएक-एक पत्ती मेंउन लबों की नरमी हैउन जमील हाथों कीख़ुशगवार हिद्दत हैउन लतीफ़ साँसों कीदिलनवाज़ ख़ुशबू है
दिल में फूल खिलते हैंरुह में चिराग़ां हैज़िन्दगी मुअत्तर है
फिर भी दिल यह कहता हैबात कुछ बना लेनावक़्त के खज़ाने सेएक पल चुरा लेनाकाश! वो ख़ुद आ जाता
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