ग़ज़ल
एक दफ़नाई हुई आवाज़
फूलों और किताबों से आरास्ता घर हैतन की हर आसाइश देने वाला साथीआँखों को ठंडक पहुँचाने वाला बच्चालेकिन उस आसाइश, उस ठंडक के रंगमहल मेंजहाँ कहीं जाती हूँबुनियादों में बेहद गहरे चुनी हुईएक आवाज़ बराबर गिरयः करती हैमुझे निकालो !मुझे निकालो !
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