ग़ज़ल

चिड़िया

परवीन शाकिर · सब कलाम देखें
सजे-सजाये घर की तन्हा चिड़िया!तेरी तारा-सी आँखों की वीरानी मेंपच्छुम जा छिपने वाले शहज़ादों की माँ का दुख हैतुझको देख के अपनी माँ को देख रही हूँसोच रही हूँसारी माँएँ एक मुक़द्दर क्यों लाती हैं?गोदें फूलों वालीआँखें फिर भी ख़ाली।
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