ग़ज़ल
कुछ ख़बर लायी तो है बादे-बहारी उसकी
कुछ ख़बर लायी तो है बादे-बहारी उसकीशायद इस राह से गुज़रेगी सवारी उसकी
मेरा चेहरा है फ़क़त उसकी नज़र से रौशनऔर बाक़ी जो है मज़मून-निगारी उसकी
आंख उठा कर जो रवादार न था देखने कावही दिल करता है अब मिन्नतो-ज़ारी उसकी
रात में आंख में हैं हल्के गुलाबी डोरेनींद से पलकें हुई जाती हैं भारी उसकी
उसके दरबार में हाज़िर हुआ यह दिल और फिरदेखने वाली थी कुछ कारगुज़ारी उसकी
आज तो उस पे ठहरती ही न थी आंख ज़राउसके जाते ही नज़र मैंने उतारी उसकी
अर्सा-ए-ख़्वाब में रहना है कि लौट आना हैफ़ैसला करने की इस बार है बारी उसकी
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