ग़ज़ल

उस वक़्त

परवीन शाकिर · सब कलाम देखें
जब आँख में शाम उतरेपलकों पे शफ़क फूलेकाजल की तरह मेरीआँखों को धनक छू लेउस वक़्त कोई उसकोआँखों से मेरी देखेपलकों से मेरी चूमे
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