ग़ज़ल
तुम्हारी ज़िन्दगी में
तुम्हारी ज़िन्दगी मेंमैं कहाँ पर हूँ ?
हवा-ए-सुबह मेंया शाम के पहले सितारे मेंझिझकती बूँदा-बाँदी मेंकि बेहद तेज़ बारिश मेंरुपहली चाँदनी मेंया कि फिर तपती दुपहरी मेंबहुत गहरे ख़यालों मेंकि बेहद सरसरी धुन में
तुम्हारी ज़िन्दगी मेंमैं कहाँ पर हूँ ?
हुजूमे-कार से घबरा केसाहिल के किनारे परकिसी वीक-ऐण्ड का वक़्फ़ाकि सिगरेट के तसलसुल मेंतुम्हारी उँगलियों के बीचआने वाली कोई बेइरादा रेशमी फ़ुरसतकि जामे-सुर्ख़ मेंयकसर तहीऔर फिर सेभर जाने का ख़ुश-आदाब लम्हाकि इक ख़्वाबे-मुहब्बत टूटनेऔर दूसरा आग़ाज़ होने केकहीं माबैन इक बेनाम लम्हे की फ़रागत ?
तुम्हारी ज़िन्दगी मेंमैं कहाँ पर हूँ ?
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