ग़ज़ल

कायनात के ख़ालिक

परवीन शाकिर · सब कलाम देखें
कायनात के ख़ालिक़ !देख तो मेरा चेहराआज मेरे होठों परकैसी मुस्कुराहट हैआज मेरी आँखों मेंकैसी जगमगाहट हैमेरी मुस्कुराहट सेतुझको याद क्या आयामेरी भीगी आँखों मेंतुझको कुछ नज़र आयाइस हसीन लम्हे कोतू तो जानता होगाइस समय की अज़मत कोतू तो मानता होगाहाँ, तेरा गुमाँ सच्चा हैहाँ, कि आज मैंने भीज़िन्दगी जनम दी है !
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