ग़ज़ल

मल्लिक न मंजुल मलिंद मतवारे मिले(ऋतु वर्णन)

पद्माकर · सब कलाम देखें
मल्लिक न मंजुल मलिंद मतवारे मिले,:::मंद मंद मारुत मुहीम मनसा की है.कहै ‘पदमाकर’ त्यों नदन नदीन नित,:::नागर नबेलिन की नजर नसा की है.दौरत दरेर देत दादुर सु दुन्दै दीह,:::दामिनी दमकंत दिसान में दसा की है.बद्दलनि बुंदनि बिलोकी बगुलात बाग,:::बंगलान बलिन बहार बरषा की है.
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