ग़ज़ल

जग जीवन को फल जानि परयो ,धनि नैनन को ठहरैयत हैँ

पद्माकर · सब कलाम देखें
जग जीवन को फल जानि परयो ,धनि नैनन को ठहरैयत हैँ ।पदमाकर हयो हुलसै पुलकै, तन सिंधु-सुधा के अन्हैयत हैँ ।मन पैरत सो रस की नद मे, अति आनन्द मे मिलि जैयत हैँ ।अब ऊँचे उरोज लखे तिय के, सुरराज को राज सो पैयत हैँ ।
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