ग़ज़ल

औरे भांति कुंजन में गुंजरत भौर भीर(ऋतु वर्णन)

पद्माकर · सब कलाम देखें
औरे भांति कुंजन में गुंजरत भौर भीर,:::औरे भांति बौरन के झौरन के ह्वै गए.कहै ‘पदमाकर’ सु औरे भांति गलियानि,:::छलिया छबीले छैल औरे छबि छ्वै गए.औरे भांति बिहँग समाज में आवाज होति,:::अबैं ऋतुराज के न आजु दिन द्वै गए.औरे रस,औरे रीति औरे राग औरे रंग,:::औरे तन औरे मन, औरे बन ह्वै गए.
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