ग़ज़ल
सम्पति सुमेर की कुबेर की जो पावै ताहि
सम्पति सुमेर की कुबेर की जो पावै ताहि,:::तुरंत लुटावत बिलम्ब उर धारै ना.कहै ‘पदमाकर’ सुहेम हय हाथिन के,:::हल्के हजारन के बितऋ बिचारे ना.दीन्हें गज बकस महीप रघुनाथ राव,:::पाय गज धोखे कहूँ काहू देइ डारै ना.याही डर गिरजा गजानन को गोय रही,:::गिरतें गरेतें निज गोद से उतारे ना.
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