ग़ज़ल

कै रति रँग थकी थिर ह्वै

पद्माकर · सब कलाम देखें
कै रति रँग थकी थिर ह्वै परजँक पै प्यारी परी सुख पाय कै ।त्योँ पदमाकर स्वेद के बुँद रहे मुकताहल से छवि छाय कै ।बिँदु रचे मेहदी के लसे कर तापर यो रह्यो आनन आय कै ।इन्दु मनो अरविन्द पै राजत इन्द्र बधून को बॄन्द बिछाय कै।
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