ग़ज़ल
एहो नंदलाल ऐसी व्याकुल पड़ी है वाल
एहो नंदलाल! ऐसी व्याकुल पड़ी है वाल,हाल ही चलौ तौ चलौ ,जोरे जुरि जायगी.कहै पद्माकर नहीं तौ ये झकोरे लगै,ओरे लौ अचाका बिन घोरे घुरि जायगी .सिरे उप्चार्ण घनेरे घनसरन सों,देखत ही देखौ दामिनी लौं दुरि जायगी.तौही लगि चैन जौलौं चेतहिं न चंद्रमुखी,चेतैगी कहूँ तौ चाँदनी में चुरि जायगी.
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