ग़ज़ल
खाये पान बीरी सी बिलोचन विराजैँ आज
खाये पान बीरी सी बिलोचन विराजैँ आज ,अँजन अंजाये अधराधर अमी के हैँ ।कहै पदमाकर गुनाकर गुबिन्द देखौ ,आरसी लै अमल कपोल किन पी के हैँ ।ऎसो अवलोकिबेई लायक मुखारबिन्द ,जाहि लखि चन्द अरविन्द होत फीके हैँ ।प्रेम रस पागि जागि आये अनुरागि यातेँ ,अब हम जानी कै हमारे भाग नीके हैँ ।
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