ग़ज़ल

तालन पै ताल पै तमालन पै मालन पै(ऋतु वर्णन)

पद्माकर · सब कलाम देखें
तालन पै ताल पै तमालन पै मालन पै,:::बृन्दावन बीथिन बहार बंसीबट पै.कहै ‘पदमाकर’ अखंड रस मंडप पै,:::मंडित उमंडी महा कालिंदी के तट पै.छिति पर छान पर छाजत छतान पर,:::ललित लतान पर लाडिली के लट पै.आई भली छाई यह सरद-जुन्हाई, जिहि ,:::पाई छबि आजु ही कन्हाई के मुकुट पै.
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