ग़ज़ल

फागु के भीर अभीरन तें

पद्माकर · सब कलाम देखें
फागु के भीर अभीरन तें गहि, गोविंदै लै गई भीतर गोरी ।भाय करी मन की पदमाकर, ऊपर नाय अबीर की झोरी ॥छीन पितंबर कंमर तें, सु बिदा दई मोड़ि कपोलन रोरी ।नैन नचाई, कह्यौ मुसक्याइ, लला ! फिर खेलन आइयो होरी ॥
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