ग़ज़ल
ओप भरी कंचुकी उरोजन पर ताने कसी
ओप भरी कंचुकी उरोजन पर ताने कसी,लागी भली भाई सी भुजान कखियाँन मेंत्योही पद्माकर जवाहर से अंग अंग,इंगुर के रंग की तरंग नखियाँन मेंफाग की उमंग अनुराग की तरंग ऐसी,वैसी छवि प्यारी की विलोकी सखियाँन मेंकेसर कपोलन पै, मुख में तमोल भरे,भाल पे गुलाल, नंदलाल अँखियाँन में
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