ग़ज़ल

मोहिं लखि सोवत बिथोरिगो सुबेनी बनी

पद्माकर · सब कलाम देखें
मोहिं लखि सोवत बिथोरिगो सुबेनी बनी,तोरिगो हिय को हार,छोरिगो सुगैया को.कहै पद्माकर त्यों घोरिगो घनेरी दुख,बोरिगो बिसासी आज लाज लागत ही की नैया को .अहित अनैसो एसो कौन उपहास?यातें,सोचन खरी मैं परी जोवति जुन्हैया को.बुझिहैं चवैया तब कैहों कहा,दैया!इत परिगो को मैया! मेरी सेज पै कन्हैया को ?
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